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January 2019
नेशनल न्यूज़

मुखौटा कंपनी व बेनामी संपत्तियों में लगा पैसा

February 19, 2018 09:59 AM

नई दिल्ली । 11,400 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि घोटाले का पैसा कम-से-कम 200 मुखौटा कंपनियों और बेनामी संपत्तियों में रफा-दफा किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने इनकी जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इन्हीं मुखौटा कंपनियों और बेनामी संपत्तियों के मार्फत नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने करोड़ों की हेराफेरी की थी। इसके साथ ही सीबीआइ विदेश स्थित दूसरे भारतीय बैंकों में तैनात अधिकारियों की भूमिका की जांच भी करने जा रहा है। इस बीच, देश के बैंकिंग तंत्र को सबसे बड़ी चपत लगाकर रफूचक्कर हुए मामा-भांजे (चौकसी और नीरव) का घोटाला उजागर होने के पांच दिन बाद भी सुराग नहीं मिला है। जांच एजेंसियां उनसे संबंधित फर्मों और शोरूम से ज्यादा से ज्यादा माल जब्ती में जुटी हैं। चौथे दिन रविवार को भी ईडी ने देश के 15 शहरों के 45 ठिकानों पर छापे मारे।
माना जा रहा है कि घोटाले का पैसा जिन कंपनियों के जरिये देश-विदेश में खपाया गया है, वे मोदी और चौकसी के परिजनों व रिश्तेदारों की हैं। ईडी दोनों मुख्य घोटालेबाजों से जुड़ी दो दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियों को भी मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत जब्त करने की तैयारी में है। मोदी और उनके परिजनों की आयकर द्वारा पूर्व में जब्त संपत्तियों की ईडी जांच कर रहा है। ईडी के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि करीब 200 फर्जी या मुखौटा कंपनियों का पता चला है, जिनके जरिये घोटाले की राशि देश-विदेश में ठिकाने लगाई गई और बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं। ये संपत्तियां जमीन, सोना और हीरे-जवाहरात के रूप में खरीदे जाने की आशंका है। इनकी जांच के लिए आयकर और ईडी ने विशेष टीमों का गठन किया है। अब तक ईडी 5,674 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुका है।
सीबीआइ ने गीतांजलि कंपनी समूह की भारत स्थित 18 सहयोगी कंपनियों की बैलेंस शीट की जांच शुरू कर दी है। ये कंपनियां मेहुल चौकसी ने बनाई हैं। घोटाले का पैसा कहां-कहां लगाया गया, इसका पता लगाया जा रहा है। सीबीआइ अफसरों ने बताया कि घोटाले के सिलसिले में शनिवार को गिरफ्तार पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी और सिंगल विंडो ऑपरेटर मनोज खराट तथा नीरव के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हेमंत भट्ट से लगातार पूछताछ जारी है। पीएनबी के कुछ अन्य अफसरों से भी पूछताछ की जा रही है। मेहुल चौकसी के खिलाफ पहली एफआइआर के बाद सीज किए गए विशाल सर्वर को भी खंगाला जा रहा है। आरोप है कि शेट्टी पिछले सात साल से पीएनबी के कोर बैंकिंग सिस्टम को बायपास कर पूरा पैसा जमा कराए बगैर मोदी और चौकसी की कंपनियों को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी कर देता था।
- शेट्टी के रिटायर के बाद हुआ खुलासा
इस साल जनवरी में पीएनबी की ब्राडी रोड शाखा, मुंबई का डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी रिटायर हो गया। नीरव मोदी की फर्म का कर्मचारी जब पहले एलओयू के नवीनीकरण के लिए पहुंचा तो उसे नए अफसर ने 100 फीसद नकद गारंटी जमा कराए बगैर इससे इन्कार कर दिया। इस पर कर्मचारी ने कहा कि पहले भी बगैर नकद गारंटी एलओयू जारी हुए हैं। इस पर बैंक अफसर हैरान रह गया। उसने पूर्व में जारी सारे एलओयू व एलसी की पड़ताल की तो पीएनबी की अन्य बैंकों की भारी देनदारी का पता चला।
- इन बिंदुओं पर अभी चल रही है जांच
--घोटाला कितना बड़ा है?
--पैसा कहां-कहां आया-गया?
--क्या बैंक से लेन-देन नियमित था?
--अन्य बैंक अफसर भी लिप्त थे क्या?
"स्विफ्ट" से भेजता था मैसेज
-गोकुलनाथ शेट्टी पैसे भेजने के लिए "स्विफ्ट" (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) सिस्टम का उपयोग करता था।
-यह मैसेजिंग सिस्टम विश्वभर में बैंकों द्वारा फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हर रोज लाखों मैसेज भेजे जाते हैं।
-पीएनबी से ये संदेश कैनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, इलाहाबाद बैंक की कई देशों की शाखाओं को भेजे गए।

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