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August 2018
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भारत की पहली महिला फाइटर पायलट उड़ाना चाहती हैं राफेल

March 09, 2018 10:08 AM

-अवनि ने कहा कि मौका मिलेगा तो खुशी होगी
नई दिल्ली। भारतीय पायलट पहली बार फ्रांसीसी फाइटर जेट को सितंबर 2019 में उड़ाएंगे। इंडियन एयरफोर्स में 2022 तक ऐसे 36 लडाकू विमान भारत आएंगे। फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी, जिन्होंने 19 फरवरी को अकेले मिग-21 उड़ाया था, कहती हैं कि वे अभी मिग-21 पर ही अपना सारा ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसकी उन्हें जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन जब इंडियन एयरफोर्स उन्हें राफेल को उड़ने के काबिल समझेंगी, तो उसे उड़ाने में मुझे खुशी होगी। इसी साल अवनी फुली ऑपरेशनल पायलट बन जाएंगी। इंडियन एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ कहते हैं कि यह गर्व की बात है कि हमारी महिला पायलट मिग-21 उड़ाने में सक्षम हैं। अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह इंडियन एयरफोर्स में सबसे चर्चित महिला चेहरे हैं, जिन्हें फाइटर जेट उड़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन इस बदलाव में एक लंबा समय लगा है। महिला दिवस के मौके पर बीएस धनोआ कहते हैं कि इस सफर में लगभग 25 साल लगे हैं। जब साल 1993 में पहली बार महिलाओं ने इंडियन एयरफोर्स को काम करना शुरू किया था, तब से आज तक चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने के अलावा महिलाओं की इंडियन एयरफोर्स में अब अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भागीदारी है। भारत की तीनों सेनाओं में से केवल एयरफोर्स में ही महिलाओं को युद्ध के मैदान में सीधे काम करने का मौका दिया गया है। वहीं दुनिया भर के अन्य देश, जैसे पाकिस्तान और चीन भी महिलाओं को फाइटर जेट उड़ाने की अनुमति देते हैं।
इंडियन एयरफोर्स में महिलाओं की संख्या लगभग 1600 है, जिनमें से 104 फ्लाइंग शाखा में हैं। साल 2014 से पहले महिलाओं को युद्ध के मैदान में काम करने की अनुमति नहीं थी। अवनी चतुर्वेदी कहती हैं कि जब उन्होंने एयरफोर्स एकेडमी में काम करना शुरू किया था, उस समय महिलाओं को फाइटर जेट उड़ाने की अनुमति नहीं थी। लेकिन जैसे ही उन्हें यह मौका मिला, तब उनके दिमाग में फाइटर जेट उड़ाने को लेकर कोई शंका नहीं थी और उन्होंने इस मौके का स्वागत किया। वहीं दूसरी ओर पहली बार सियाचिन ग्लेशियर पर हैलीफॉप्टर लैंड करने वाली महिला पायलट खुशबू गुप्ता कहती हैं कि इंडियन एयरफोर्स में पिछले 25 सालों में काफी कुछ बदला है। खुशबू गुप्ता लेह स्थित 114 हैलीकॉप्टर यूनिट में काम करने वाली दो पायलटों में से एक हैं। इस यूनिट को सियाचिन पायनियर्स भी कहा जाता है। वह कहती हैं कि उनकी ट्रैनिंग के दौरान उनके इंस्ट्रक्टर कहते थे कि लद्दाख में पोस्टिंग और वहां हैलीकॉप्टर उड़ाने के बारे में सोचना भी मत और आज वह सियाचिन में 20 हजार फीट की ऊचांई पर छोटे-छोटे हैलीपैड्स पर अपने चीता हैलीकॉप्टर को लैंड करती हैं। हालांकि इन हैलीकॉप्टर्स को ऊचें इलाकों में उड़ाने के लिए डिजायन किया गया है। लेकिन इतनी ऊंचाई के लिए नहीं, जितनी ऊंचाई पर वे इन्हें उड़ाती हैं।

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